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कोलकाता मेट्रो – सुधार की राह पर

अपने आकार में छोटा होते हुए भी मेट्रो रेलवे 1984 से ही अपनी यात्रा के माध्‍यम से कोलकाता के लोगों के ह्रदयों में अपनी विशिष्‍ट स्‍थान प्राप्‍त करने में सफल रही है। मेट्रो रेलवे को एक विशिष्‍ट पहचान दिलाने में मेट्रो रेल कर्मियों की अथक एवं अतुलनीय प्रयासों की अहम भूमिका रही है जिसके कारण मेट्रो रेलवे को सिटी ऑफ ज्‍वॉय के रूप में उदघोषित एवं सम्‍मानित होने का अवसर प्राप्‍त हुआ सका है।
समयांतराल के साथ ही मेट्रो के वर्तमान स्‍वरूप में नए आधारभूत अवसंरचनाओं एवं आधुनिकतम प्रौद्योगिकी को सतत एवं निरंतर आधार पर अपनाया गया जिसके फलस्‍वरूप यात्रियों की संरक्षा एवं सुरक्षा सुनिश्‍चित करते हुए परिवहन की एक सशक्त एवं प्रबल साधन उपलब्‍ध हो पाई है।
वर्तमान में मेट्रो रेलवे का भौगोलिक क्षेत्र 27 किमी. की लंबाई पर फैला हुआ है जिसका उचित समयांतराल पर 90 किमी. लंबी नई स्‍वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्‍वित होने के बाद और अधिक बढ़ने की संभावना है और यह इस महानगर की संपूर्ण लंबाई एवं चौड़ाई को कवर कर सकेगी।  इस सूक्‍ति (मेट्रो सर्वत्र) को वास्‍तविकता में परिणत करने एवं इसे स्‍पर्शगोचर बनाने के लिए सुविधाओं एवं अपेक्षाओं के क्षेत्र में प्रणाली को यात्री हितैषीपूर्ण बनाने की दिशा में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है।
                                                                                      

मेट्रो के वर्तमान स्‍वरूप एवं आकार को और अधिक ऊँचाई पर ले जाने के हमारे प्रयास में मेट्रो प्रशासन ने उस सुधार की राह पर चलने का संकल्‍प लिया है जिस दिशा में वांछित परिणाम प्राप्‍त करने के लिए उपयुक्‍त संकल्‍पों (उद्देश्‍यो) को अवसर प्रदान कर दिए गए हैं। सुधार की चुनौतीपूर्ण राह में मेट्रो ने अपनी आंतरिक क्षमता का पुनर्अंकन कर लिया है। यह सुस्‍पष्‍ट है कि शत प्रतिशत बड़ी टिकट सुधार एवं विकास पर अधिक जोर देने हेतु सुधार की गति को लगातार जारी रखा जाएगा। अभिनव परिवर्तन मेट्रो संस्‍कृति की आधार-शैल होगी जो अंतत: हमारे प्रांत की रूपरेखा के प्राकार का निर्माण करेगी।

             निष्‍पादन मानदंडों में सुधार पर निरंतर अवलोकन से वांछित परिणाम प्राप्‍त हुए हैं तथा यह मसलों को उन्‍नत करने के लिए प्रारंभ किए गए पहलों की झोंकों की ओर स्‍पष्‍ट संकेत करती है।

निष्‍पादन पैरामीटर

 

·    चालू वित्‍त वर्ष के दौरान यात्री आयपिछले वर्ष के 144.46 करोड़ रुपये की तुलना में बढ़कर 150.0 करोड़रुपये रही जिससे अभिवृद्धि का प्रतिशत 3.83% रहा।

 

·    पिछले वर्ष के दौरान 13.97 करोड़रुपये की तुलना में चालू वित्‍त वर्ष के दौरान फुटकर आय 14.86 करोड़ रुपये रही जिससे ऊर्ध्‍वगामी अभिवृद्धि का प्रतिशत 6.37% रहा।

 

·    पिछले वर्ष के 158.43 करोड़ रुपये की तुलना में चालू वर्ष के दौरान कुल आय बढ़कर 164.86 करोड़ रुपये रही जिससे 4.07% प्रतिशत की अप्रत्‍यशित वृद्धि दर प्राप्‍त की गई। 


·     पिछले वर्ष की तुलना में यात्री परिवहन के क्षेत्र में 4.20% का सुधार हुआ है।

 

·    ईसीएस के माध्‍यम से रिकार्ड सात दिनों के भीतर सभी कर्मचारियों को बोनस भुगतान किया गया जो भारतीय रेलवे में सबसे तीव्रतम था।


परिचालनिक संबंधी प्रमुख बातें

 ·   दमदम से नोआपाड़ा मेट्रो स्‍टेशनों के बीच मेट्रो सेवाओं को 54 से बढ़ाकर 74 किया गया।
·   पार्क स्‍ट्रीट मेट्रो स्‍टेशन में दो खराब पड़े प्रवेश/निकासी गेटों को दस वर्षों के अंतराल के पश्‍चात त्‍यौहार के दौरान    होनेवाले भीड़-भाड़ से त्‍वरित निपटान हेतु जनता के उपयोग के लिए खोल दिया गया ।

·    दुर्गा पूजा के दौरान होनेवाली अत्‍यधिक भीड़ का निपटान सफलता एवं सुगमतापूर्वक किया गया। दुर्गापूजा 2015 के दौरान विशेष व्‍यवस्‍थाएं की गईं जिसके अंतर्गत पिछले वर्ष के दौरान 636 गाड़ियों की तुलना में कुल 738 गाड़ियां चलाईं गईं अर्थात 16.04 प्रतिशत का सुधार हुआ जो पूजा के दौरान चलाई गई अब तक  की सबसे अधिक संख्‍या है। पूजा से पूर्व कुल 575 अतिरिक्‍त गाड़ियां चलायी गईं अर्थात पिछले वर्ष की तुलना में 84.29% अधिक गाड़ियां चलाई गईं। पूजा के दौरान औसत यात्री/दिन एवं औसत आय/दिन क्रमश: 5.55% एवं 7.79% रहा।


·    अगस्‍त ’14 से प्रारंभ होने के बाद से ही गाड़ी सुरक्षा चेतावनी प्रणाली में कई तकनीकी खामियां पायी गईं जिससे परिचालन के प्रथम वर्ष में प्रणाली की उपलब्‍धता 50% से भी कम रही। टीपीडब्‍ल्यूएस की समस्‍याओं का विश्‍लेषण कर लिया गया है तथा सॉफ्टवेयर संशोधन, पावर आपूर्ति मोड्यूलों में अतिरिक्‍त तरंग सुरक्षा जैसे सुधारात्‍मक कार्रवाई से उपलब्‍धता में लगभग 100% का सुधार हुआ है अर्थात सभी प्रणालियां अधिकांश दिवसों में कार्यशील थे।


·    अगस्‍त,’14 में चालू किए जाने के बाद प्रारंभिक कठिनाइयों के कारण जीएसएम-आर अधिकांशत: गैर-परिचालित ही रहा। विफलता की गहन विश्‍लेषण के बाद वैकल्‍पिक मार्ग के माध्‍यम से नई दिल्‍ली स्‍थित मोबाईल स्‍विचिंग सेंटर के साथ संपर्क उपलब्‍ध कराया गया। विभिन्‍न मोड्यूलों में भी विद्युत आपूर्ति प्रणाली को सुदृढ़ किया गया। इन उपायों से प्रणाली उपलब्‍धता में 100% तक सुधार हुआ है तथा इससे मोटमैन, संरक्षा एवं अनुरक्षण कर्मियों के विश्‍वास स्‍तर को बल मिला है।


·    तृतीय रेल डीसी पावर की विश्‍वासनीयता में सुधार के लिए रेक भार के अनुरूप डीसी रिले सेटिंग को परिवर्तित कर ट्रिपिंग की संख्‍या काफी हद तक कम करते हुए इसे 38%तक कम किया जा सका है।


·    सेक्‍शन के सभी अनावश्‍यक केबलों को हटा दिया गया है जिससे कभी-कभी गाड़ी संचलन में व्‍यवधान उत्‍पन्‍न होता था।


·    रद्दी निपटान के क्षेत्र रेलवे बोर्ड द्वारा प्रदत्‍त लक्ष्‍य (2.0 करोड़) से 17.5%अधिक के लक्ष्‍य को पहले ही प्राप्‍त कर लिया गया है। काफी समय से अप्रयुक्‍त वाहनों, फर्नीचरों, उपकरणों को अनुपयोगी घोषित करते हुए उनका निपटान कर दिया गया है।


·    द.पू.मध्‍य रेलवे से छह लोको पायलटों (गुड्स) के प्रवेशन से रिक्‍त पद होने के कारण लोको पायलट (शंटर) को ओवरटाइम के लिए किए जानेवाले 70 लाख का भुगतान अब शून्‍य हो गया है।


·    पिछले वर्ष की तुलना में गैर कर्षण ऊर्जा की खपत घटकर 16.57% रह गई है। पिछले वर्ष की तुलना में कुल ऊर्जा खपत घटकर 6.28 % रह गई है। चालू वर्ष के दौरान 6.1 मिलियन इकाई ऊर्जा की बचत हुई है जिससे 4.34 करोड़ रुपये की बचत हुई है। ऊर्जा खपत की यह पद्धति प्रशंसनीय है विशेषकर उन परिस्‍थितियों में जब दो तुलनीय अवधि में गाड़ी सेवाओं, यात्रियों एवं यात्री आय में क्रमश 3.00%, 4.20% एवं 3.83% की वृद्धि दर्ज की गई है। 

          

यात्री सुविधाएं

·         
वृद्ध एवं अन्‍य रूप से सक्षम यात्रियों की सुविधा के लिए दमदम स्‍टेशन के अप प्‍लेटफॉर्म पर परिवर्ती वोल्‍टेज परिवर्ती फ्रीक्‍वेंसी (आवृति) ड्राइव (वीवीवीएफ) के साथ एक लिफ्ट की व्‍यवस्‍था की गई है। मेट्रो भवन स्‍थित वीआईपी लिफ्ट में भी वीवीवीएफ ड्राइव लगाकर इसे पुन: चालू किया गया है तथा इसे सबसे ऊपरी तल तक विस्‍तारित कर इसे उन्‍नत बनाया गया है। 


·    वातानुकूलित डिब्‍बों के भीतर रुफ माउंटेड पैकेज यूनिट (आरएमपीयू) से पानी का टपकना मेट्रो प्रणाली में इन रेकों को प्रयोग के प्रारंभ से ही एक पुरानी और चिरकालीक समस्‍या रही है। इसे बेहतर कार्ययोजना के माध्‍यम से ठीक कर लिया गया है।

 

·     कालीघाट एवं रवींद्र सरोवर स्‍टेशनों में संस्‍थापित पुराने केंद्रीकृत वातानुकूलित संयंत्रों (630टीआर) के स्‍थान पर उन्‍नत ऊर्जा दक्ष पैरामीटर वाले नए संयंत्र (800टीआर) स्‍थापित किए गए हैं।

 

·    420 लाईट एमिटिंग डायोड (एलईडी) ट्यूब लाइटें लगाए जाने के बाद रवींद्र सदन एवं रवींद्र सरोवर स्‍टेशनों को हरित स्‍टेशनें घोषित करने हेतु इन स्‍टेशनों पर लगे सभी लाईट फिटिंग को बदलकर उनके स्‍थान पर एलईडी बत्‍तियां लगाई जाएंगी।

  •  एक रेक में ऊर्जा दक्ष एलईडी बत्‍तियां लगा दी गईं हैं एक अन्‍य रेक में इसे अप्रैल, ’16 तक पूरा कर लिया जाएगा।

·    सभी भूमिगत मेट्रो स्‍टेशनों को अपने दायरे में कवर करने के लिए तीन मेट्रो स्‍टेशनों पर नि:शुल्‍क वाई-फाई सुविधा प्रदान की गई है।

 

·    अंतर्राष्‍ट्रीय मानकों के अनुरूप दस स्‍टेशनों में नए साइनबोर्ड लगा दिए गए हैं तथा अन्‍य सात स्‍टेशनों में शीघ्र ही इन्‍हें लगाया जाएगा।

 प्रणाली पहल

 

·    स्‍वीकृत मेट्रो परियोजनाओं को गति प्रदान करने हेतु 1.66 हेक्‍टेयर निजी भूमि का अधिग्रहण कर आरवीएनएल को सौंप दिया गया है।

 

·    जोका-बीबीडी बाग मेट्रो परियोजना के लिए डायमंड हार्बर रोड के समानांतर चलने वाली संरेखण के लिए विक्‍टोरिया,पार्क स्‍ट्रीट एवं एस्‍प्‍लानेड स्‍टेशन पर मेट्रो स्‍टेशनों के निर्माण हेतु रक्षा मंत्रालय से अनापत्‍ति पत्र प्राप्‍त हो चुका है।

·     उत्‍पादकता में सुधार के लिए दिन प्रतिदिन के कार्यों को सुगम बनाने के प्रयास के रूप में दस वर्षों के बाद शक्‍ति की अनुसूची (शेड्यूल ऑफ पावर) (विविध) को संशोधित किया गया है।.


·     लेखा सुधारों के एक भाग के रूप में परिसंपति पंजिका (एसेट रजिस्‍टर) का संकलन करनेवाला प्रथम क्षेत्रीय रेल के रूप में मेट्रो रेलवे ने ब्‍लॉक एकाउंट को 5153 करोड़ रुपये से घटाकर 4122 करोड़ रुपया किया और इस प्रकार भारतीय रेल द्वारा भारत सरकार को दी जानेवाली सतत लाभांश भुगतान में कमी लायी जा सकी तथा मेट्रो रेलवे के डीआरएफ अंशदान में भी अनुपातिक कमी आई।

 
·    स्‍मार्ट टोकन को संरक्षित करने एवं स्‍मार्ट कार्डों को लोकप्रिय बनाने के प्रयास में व्‍यवसायिक नियमों को संशोधित किया गया है।

 

·    वातानुकूलित रेकों की पीओएच अनुसूची को आरडीएसओ की ओर से अंतिम रूप दिया जा चुका है और पहली बार प्रथम वातानुकूलित रेक (2010 विंटेज की सबसे पुरानी रेक) का पीओएच सफलतापूर्वक संपन्‍न किया गया। इनमें माइक्रोप्रोसेसर आधारित कर्षण एवं ब्रेक नियंत्रण इकाई, स्‍थिर सहायक इनवर्टर, यात्री सूचना एवं गाड़ी सूचना प्रणाली जैसे प्रमुख विशिष्‍टताएं हैं जो इन्‍हें गैर वातानुकूलित रेकों से अलग करते हैं। पीओएच के बाद रेक को बिना किसी प्रकार की त्रुटि, विफलता और यात्री असुविधा के वाणिज्‍यिक सेवा में लगा दिया गया है।

 

·    अनुरक्षण कर्मियों को प्रशिक्षण देने हेतु नोआपाड़ा में रेलपथ एवं कार्य के लिए इंजीनियरी प्रशिक्षण केंद्र की  स्‍थापना की गई है। इसका उदघाटन 17.10.15 को एक सेवानिवृत होनेवाले ट्रैकमैन द्वारा किया गया था।

·    मेट्रो भवन स्‍थित नवीकृत कर्मचारी भोजनालय का उदघाटन 18.11.15 को सबसे वरिष्‍ठ कर्मचारी द्वारा किया गया।

 

·    नोआपाड़ा में पीने योग्‍य पानी की चिर लंबित मांग को पूरा करते हुए पीओएच शेड में एक रिवर्स ओस्‍मोसिस (आरओ प्‍लांट) संयंत्र को चालू किया गया।

·    मानव संसाधन उत्‍पादकता में सुधार करने तथा कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए अत्‍यवधान चयन कैंलेंडर के साथ पिछले पांच महीनों के भीतर अर्थात सितंबर,’15 से जनवरी,’16 तक 500 कर्मचारियों को एमएसीपी सहित अन्‍य पदोन्‍नति लाभ प्रदान किए गए।

·    कर्मचारियों की उचित सेवा अभिलेख सुनिश्‍चित करने हेतु सभी सेवा पुस्‍तिकाओं को अद्यतन किया गया तथा सभी कर्मचारियों को उनके 100 प्रतिशत संतोष के साथ व्‍यक्‍तिगत रूप से पुष्‍टि की गई।

·    14.12.15 को आयोजित पेंशन अदालत में चार मामले दाखिल किए गए। एक दिन में ही दो मामलों का निपटान किया गया जो मेट्रो रेलवे की सुदृढ़ समस्‍या निवारण प्रणाली की मात्रा को इस तथ्‍य के वावजूद स्‍पष्‍ट करती है कि इस रेलवे में 2400 पेंशनधारी हैं।

·    रोड़ी रहित ट्रैक एवं सामान्‍य रूप से कार्यों के लिए कार्य निविदाओं को सरल और कारगार बनाने हेतु सभी गैर-अनुसूची मदों को शामिल करते हुए मेट्रो रेलवे मानक अनुसूची दर रेलपथ एवं कार्य जारी किया गया। एलएआरएस/दर विश्‍लेषण एवं ट्रैक के अनुरक्षण से प्राप्‍त अनुभव के आधार पर दरों की एकीकृत मानक अनुसूची में संशोधन किया गया है।

संरक्षा

·    असुविधाओं को न्‍यूनतम बनाने के प्रयास में सुरंग के भीतर से यात्रियों निकासी में पहले लगने वाले एक घंटे के समय को कम करते हुए 40 मिनट की अवधि के लिए निकासी योजना को संशोधित किया गया है।

 

·    डिब्‍बों की विश्‍वासनीयता में सुधार एवं यात्री सुरक्षा सुनिश्‍चित करने के लिए पुराने डिब्‍बों के एकल शलाका (रड) को प्रतिस्‍थापित करने का काम किया जा रहा है। 


·    दरवाजों के बीच यात्रियों के अटक जाने की समस्‍या का निराकरण करने तथा दरवाजों का सुरक्षित रूप से बंद होना सुनिश्‍चित करने के लिए एक रेक में दरवाजा बंद होने की प्रणाली को संशोधित किया गया है। यह सुनिश्‍चित करने के लिए इंटरलॉक उपलब्‍ध कराए गए हैं कि दरवाजों के बंद होने से पहले यात्रियों को दृश्‍य-श्रव्‍य संकेत देने हेतु मोटरमैन को चेतावनी स्‍विच दबाने की आवश्‍यकता होगी। अन्‍य सभी रेकों में इसे मार्च ’16तक पूरा कर लिया जाएगा।

नवपरिवर्तन

 

·    60 सेकेंड से प्रारंभ कर विपरीत गिनती करते हुए पांच स्‍टेशनों पर गाड़ी आगमन/प्रदर्शन प्रणाली उपलब्‍ध करायी गई है।

 

 

·    महानायक उत्‍तम कुमार स्‍टेशन के साथ-साथ वातानुकूलित रेकों के भीतर भी 20 नवंबर, 2015 को रेलवे पर डाक टिकट संग्रहण प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

 

·    बार-बार प्रयुक्‍त किए जानेवाले स्‍थानों पर सिगनलों की विश्‍वासनीयता में सुधार के लिए प्‍वाइंटों एवं क्रॉसिंग में प्रयुक्‍त होने वाले लकड़ी के स्‍लीपरों के स्‍थान पर दमदम एवं टॉलीगंज स्‍टेशनों में उपलब्‍ध मौजूदा कंक्रीट स्‍लीपरों को रूपांतरित कर कंक्रीट स्‍लीपर लगाए गए हैं। मेट्रो रेलवे में इस प्रकार का आंतरिक नवपरिवर्तन पहली बार किया गया है।

 

·    20.11.15 को मेट्रो सेवा के 31 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्‍य में एक विशिष्‍ट प्रथम दिवस डाक कवर का भी विमोचन किया गया।

  


रेलवे बोर्ड के दिशानिर्देशों के अनुरूप स्‍वच्‍छता को एक मिशन के रूप में तथा हरित मेट्रो स्‍वच्‍छ मेट्रो को प्रेरक शक्‍ति के रूप में अपनाया गया है। स्‍वच्‍छ भारत मिशन का अनुपालन राष्‍ट्रपिता की जयंती 2 अक्‍टूबर,’15 के दिन किया गया तथा उस अवसर पर आवश्‍यक शपथ दिलाया गया। अभियान के दौरान सभी स्‍टेशनों कर्मचारी आवासों एवं विद्युत संस्‍थापनों का उचित रख-रखाव सुनिश्‍चित करने हेतु अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा श्रम दान भी किया गया।

·    जागरूकता उत्‍पन्‍न करने के लिए वॉक ए थॅान का आयोजन किया गया जिसमें लायंस क्‍लब, हावड़ा प्रोग्रेसिव, विकास भारती कल्‍याण समिति, आगंतुक तथा नरेंद्रपुर रामकृष्‍ण मिशन जैसे गैर सरकारी संग्‍ठनों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

खेल-कूद

 

·सभी क्षेत्रों में सफलता अर्जित करने के बाद मेट्रो रेलवे फुटबॉल टीम ने 72वें अखिल भारतीय रेलवे फुटबॉल चैंपियनशिप के अंतिम मैच में पश्‍चिम रेलवे को हराकर पहली बार चैंपियनशिप का खिताब हासिल किया।   तथा पूरे टूर्नामेंट के दौरान नाबाद रहा।


·     रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे एवं टी-20 चैंपियनशिप में तीन खिलाड़ियों ने सीनियर इडियन रेलवे टीम का प्रतिनिधित्‍व किया।

 

·     मेट्रो रेलवे की ब्रीज टीम अक्‍टूबर, 15 को कोलकाता में आयोजित अखिल भारतीय अंतर रेलवे चैंपियनशिप में चैंपियन रही।

 

स्‍काउट एवं गाइड

 

·     12 सदस्‍यों के दल ने अगस्‍त 15 के दौरान हिमाचल प्रदेश में अपने पर्वतारोहण अभियान सह ट्रेकिंग कार्यक्रम के तहत मांउट काऊ रंग-।। (ऊँचाई 6187 मी.) की चोटी पर चढ़ने में सफलता पायी।  स्‍वैच्‍छिक रक्‍तदाता संघ के समन्‍वय से 27.11.15 को एक स्‍वैच्‍छिक रक्‍तदान शिविर का भी आयोजन किया गया।

 

प्रचार एवं जनसंपर्क 

    जनसंपर्क विभाग ने मेट्रो रेलवे की साकारात्‍मक छवि के निर्माण में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभायी है। प्रिंट एवं इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया दोनों ने ही विभिन्‍न अवसरों पर और विशेषकर यात्री सुविधाओं हरित ऊर्जा पहल, स्‍वच्‍छता अभियान, संरक्षा आदि के क्षेत्र में नई शुरूआत के अवसर पर मेट्रो रेलवे की भूमिका को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। सुधार की राह पर मेट्रो रेलवे की इस सफर में मीडिया ने अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण भूमिका निभायी है।

 

सभी क्रियाकलापों में मान्‍यताप्राप्‍त संघ की संलिप्‍तता से मेट्रो रेलवे की कार्य संस्‍कृति में संपूर्ण परिवर्तन हुआ है। मान्‍यताप्राप्‍त संघ अर्थात एमटीपीआरएमयू के लिए नोआपाड़ा एवं टॉलीगंज में संघ का एक नया कार्यालय खोला गया है।  

मार्ग आगे

मेट्रो रेलवे की अंतर्निहित एवं अंतर्भूत प्रकृति विभिन्‍न प्रकार की विषमताओं से अटी पड़ी है जो इसके भविष्‍य की राह में कठिन चुनौतियों उत्‍पन्‍न करते हैं। फिर भी मेट्रो रेलवे विगत काल की बंधनों को तोड़कर आगे बढ़ने तथा विकास के पथ पर निरंतर एवं सतत रूप से अग्रसर होने लिए तैयार है। उत्‍तर-दक्षिण गलियारे में 90 किमी. तथा पूर्व-पश्‍चिम गलियारे में 16.6 किमी. के विस्‍तार के साथ प्रमुख विस्‍तार योजना पर  विचार किया जा रहा है।

जोका –बीबीडी बाग वाया माझेरहाट
(कुल लंबाई 18.72 किमी.)
नोआपाड़ा-बारासात वाया विमानबंदर (कुल लंबाई18.13 किमी.)
दमदम-बराहनगर (कुल लंबाई 4.5 किमी )
कवि सुभाष-बिमानबंदर वाया राजरहाट (कुल लंबाई 32.00 किमी.

·
केएमआरसीएल द्वारा निष्‍पादित की जा रही पूर्व पश्‍चिम मेट्रो गलियारे का चरणवार समापन :

i.    चरण – I (9.4 किमी.):  सेक्‍टर V सॉल्‍ट लेक से सियालदाह, अगस्‍त,’18 तक

ii.   चरण– II (7.2 किमी.):  सियालदाह से हावड़ा मैदान तक, जून,’19 तक


·   
यात्रियों की सुविधाओं में सुधार का लक्ष्‍य प्रमुख होने के कारण पुराने डिब्‍बों के स्‍थान पर मेसर्स दालियन लोकोमोटिव एवं रॉलिंग स्‍टॉक कंपनी लि., चीन द्वारा विनिर्मित नवीनतम प्रौद्योगिकी से युक्‍त 14 नए आधुनिकतम रेकों को सेवा में लगाया जाएगा।

·   
एनजीईएफ निर्मित सात पुराने रेकों को बेहतर यात्री सुविधाओं के साथ पुनर्निर्माण किया जा रहा है।
·    दमदम एवं नोआपाड़ा के बीच अनुभागीय समय को कम करने के लिए गति को 30 किमी/घंटा से बढ़ाकर 45 किमी/घंटा किया जाएगा।

नवपरिवर्तन उपायों के अतिरिक्‍त चुनौतियों का सामना करने की हमारी अक्षय इच्‍छाशक्‍ति के बल पर। हमारे इर्द-गिर्द के कार्य परिवेश उत्‍कृष्‍टता की प्रबल इच्‍छा द्वारा शासित होते हैं जिनसे कोई भी दूर नहीं भाग सकता। किसी भी अवसर को हाथ से जाने नहीं दिया जाता है जिसके प्रभाव से इस क्षमता की भावी सफलता में बृहत भूमिका है। मेट्रो ने एक नए कोड का निर्माण किया है जो खंडश: परिवर्तन के बदले एक एकीकृत प्रस्‍तावों पर आधारित है। यह पूर्णत: हमारी प्रणाली की तंत्र में अंतर्निहित है जो हम सभी के द्वारा प्रशंसित एवं समर्थनीय है। प्रत्‍येक जन को क्रियाकलापों में संलिप्‍त करने हेतु मेट्रो कल्‍पन को प्रज्‍जवलित कर दिया गया है जो एक उदात्‍त विचारधारा है जिसके प्रति हम सभी निष्‍ठावन रहेंगे।

और अब हम अपने आप से यह पूछें कि क्‍या हम मेट्रो रेलवे के सुनहरे भविष्‍य को शक्‍ति प्रदान करने हेतु कुछ महत्‍वकांक्षी और विशिष्‍ट कार्य कर सकते हैं अथवा नहीं।






Source : मेट्रो रेलवे कोलकता / भारतीय रेल का पोर्टल CMS Team Last Reviewed on: 08-02-2017  


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